सुबह की चाय

भोर की पहली किरण में बिखरता है खुमार,
चाय की प्याली में घुलता है जादू अपार।

बगीचों में फैली हरियाली संग चिड़ियों का चहचहाना,
चाय की गर्माहट में, सब सुखद लगता है, खास समझाना।

इस चाय के कश में, दिन की उम्मीदें बंधी,
जैसे नये दिन की नयी कहानी हो रची।

स्वप्नों से जागरण तक की यात्रा है आसान,
जब हाथों में होती है प्यारी, गरम चाय की प्याली थाम।