सुबह की चाय

उजाले में ढली रात की कहानी
गर्म चाय की पहली चुस्की, जीवन की बानी

भाप उठती, सुरभि फैलती कमरे में
एक अनोखी शांति, मेरे अंतर में

पुरानी खिड़की से झाँकता सुबह का सूरज
मेरी प्याली में डूबता, मधुर संतोष

चुस्की दर चुस्की, मन की प्यास बुझती
जैसे कोई कहानी, धीरे-धीरे खुलती