सुबह की चाय

उजाले में धुंधली सी,
केतली में उमंग भरी
एक चुस्की, एक सांस में
जैसे जीवन की पहली खुशी

भाप उठती, अरोमा फैलता
मसाले की सुगंध में स्वाद जगता
थोड़ा दूध, थोड़ी चाय
सुबह की इस प्याली में मिलता ख़याल

कल की थकान धुलती है
नई उम्मीदों का संचार होता
हर घूंट में एक नई ऊर्जा
जैसे जीवन फिर से शुरू होता