धीमी धीमी उषा की लाली में,
चाय की प्याली लिए हाथों में,
देखूं दुनिया को जागते हुए,
सूरज की किरणों को बाग़ में खेलते हुए।
इस चाय की महक में है,
सुबह का नया जोश और ताजगी,
एक सिप में छुपी है,
दिन की सारी तैयारी और राहत की गहराई।
हर घूंट में स्वाद अनेक,
मानो कहती हो, "जी ले यह पल भी एक",
चाय की इस प्याली में,
है प्रेम, सपने और सुकून की नमी।
सुबह की चाय, ना सिर्फ पेय है,
यह तो जीवन की सुंदर संगीत है,
जो बुनती है हर दिन एक नई कहानी,
सपनों और उम्मीदों की नई जुबानी।