भोर की पहली किरण संग,
उस चाय की प्याली मांग।
अदरक-इलायची का संगम,
कुछ पलों का शांत अनुबंध।
भाप में छुपे उन सपनों का रंग,
नींद से जागते, नए आसमान के संग।
मिट्टी की सोंधी खुशबू संग घूली,
सुबह की चाय, जीवन का सुकून भरी दूल्ही।
भोर की पहली किरण संग,
उस चाय की प्याली मांग।
अदरक-इलायची का संगम,
कुछ पलों का शांत अनुबंध।
भाप में छुपे उन सपनों का रंग,
नींद से जागते, नए आसमान के संग।
मिट्टी की सोंधी खुशबू संग घूली,
सुबह की चाय, जीवन का सुकून भरी दूल्ही।