सुबह की पहली रोशनी में

चाय की महक से जगा दिन,

नींद से भागे, ख्वाब से आगे

इस कप में है संगीत और संगीन।

धीमी आंच पर उबलता पानी,

अदरक, इलायची का जादूगरी साथ,

मीठी लोरी सी, मन को लगाती

थकन छूटे, आँखें खोले रात।

सुबह की चाय, बातों का साथी,

रिश्तों की गहराई में ले जाए,

हर घूंट में बसा, नई उमंग,

जैसे हर नई सुबह, नई कहानी सुनाए।