N Nandini Sadvipra hi 12 जनवरी 2026 सुबह की रोशनी रंग बिखेरती आई , नींद की चादर आंखों से धीरे से हटाए। ओस के पत्तों… सुबह की रोशनी रंग बिखेरती आई ,नींद की चादर आंखों से धीरे से हटाए।ओस के पत्तों पर मोती सजाए,नए सपनों ने मन में दीप जलाए।हर किरण बोली...आज फिर शुरुआत आई।