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सुबह की रोशनी रंग बिखेरती आई , नींद की चादर आंखों से धीरे से हटाए। ओस के पत्तों…

सुबह की रोशनी रंग बिखेरती आई ,
नींद की चादर आंखों से धीरे से हटाए।
ओस के पत्तों पर मोती सजाए,
नए सपनों ने मन में दीप जलाए।
हर किरण बोली...आज फिर शुरुआत आई।