A

सुना था

सुना था मंजिलों में हमसफर मिल जाए तो मुकदर बदल जाती हैं।
उसका हाथ थामा था मैंने हमसफर मन कर।।
पर अब मंजिलों में हमसफर नहीं मिलते।
मिलते है तो बस रास्तों के साथी।।
उसने मेरा हाथ छोड़ा एक रास्ते का मुसाफिर समझ कर।
और मैं वही रुक गया उसे अपना तकदीर समझ कर।।
सुना था मंजिलों में हमसफर मिल जाए तो मुकदर बदल जाती हैं।
©adish