R rishab hi 23 जुलाई 2025 "सूरमा" कि स्याही ख़तम हो गई थी मेरे कलम की,तेरा सूरमा ज़रा उधार लिया था;पता नहीं कब तेरी आंखे लिख दी, अनजान और बेकरार।©rishab