सवाल
तुम्हें क्या ख़बर दर्द किस मोड़ पर है,
हर आँसू भी अब बस ख़ामोश नज़र है,
ज़ख़्म छुपा कर भी मुस्कुराना पड़ता है,
ये ज़िंदगी है या सज़ा-ए-सफ़र है ?सवाल
तुम्हें क्या ख़बर दर्द किस मोड़ पर है,
हर आँसू भी अब बस ख़ामोश नज़र है,
ज़ख़्म छुपा कर भी मुस्कुराना पड़ता है,
ये ज़िंदगी है या सज़ा-ए-सफ़र है ?