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स्वप्न

स्वप्नों की स्वर्नजली के मधुर मधुर गीत
अवचेतन मन की अवधारणाओं के मीत
उन्मुक्त यू उड़ते है इस स्वप्न यात्रा में हम
कुछ क्षण करे आनंदित हमे कुछ करे नम
साधरण से असाधारण तक समाहित है
दृश्यों की ऐसी है बेला, मन लालियत है
कभी यू प्रतीत की सत्य घटित हो रहा हो
यतार्थ का अनुभव स्वप्न को छू रहा हो
इस स्वप्नलोक की लीला के अनूठे से रंग
जागे, पर जाने क्यूं है मन निद्रा के संग
अब तो खुले नैनो से भी स्वप्न देख लेते है
अद्भुत अकल्पनीय एक जगत देख लेते है
©shahidkhan