सूखेगा नहीं आँखों का पानी तब तक ,
सुनाता रहूँगा दर्दभरी कहानी तब तक ।।
पहुँची जब तलक ये खबर शहर में ,
पूरा गाँव बहा ले गयी सुनामी तब तक ।।
लगा दी थी पाबंधियाँ इश्क पर मग़र ,
लुटा चुका था कोई जवानी तब तक ।।
चंद दिनों रह आए किसी दिल में वर्ना ,
बेदर्द नहीं थी हमारी बे-मकानी तब तक ।।
अब अजनबी बनकर मिलना है उनसे ,
मिटा देंगे उसकी हर निशानी तब तक ।।
बस कुछ पलों का सफर बाकी है हेमन्त ,
सुनों मेरी कहानी मेरी जबानी तब तक ।।
©kaliramana
K