मेरे कुछ अल्फ़ाज़ है
सच नहीं पर,
कुछ शब्दो का मोहताज है
सच नहीं पर
कुछ किस्सों की आग है.......
मेरी कुछ अलफ़ाज़ की कहानी मे,
सफर मे हमसफ़र बन कर,
अंधेरा को उजाला कर,
मेरी तन्हाई मे,
तेरी दुहाई से,
गुमसुदा जिंदगी मे,
तूने प्यार की चादर से,
छीपा कर रख लिया.....
अँधेरे मे रौशनी के दिये जला दिया....
शिकवा है खुदा से
तूने उसको मुझसे छीन लिया
सुख की झोली मे गम भर दिया
अब,
उसकी याद मे रोता हूं
उसकी कब्र के पास सोता हूं
अपने गम के आसुओं से खुद को धोता हूं....
उसकी इंतज़ार मे रोता हूं....
उसकी इंतज़ार मे रोता हूं .....
-Durga(Diya)
©diyadeepak
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