कभी कभी ऐसे situation आ
जाती है हमारे सामने
जहां दिल कुछ चाह रहा होता हैं
और दिमाख कुछ सोच रहा होता
हे....!!
क्या करें क्या ना करें बस यही कुछ
भी समझ नहीं आता....!!!
हम सही कर रहे हैं या नहीं अजीब
कशमकश में फस जाते हैं...!!
ना जाने क्या होगा क्या नहीं यही
सोच कर एक डर हो जाता है....!!
आंखों के सामने होते हुए भी सब
फिर भी क्या सही है क्या नहीं
समझ नहीं आता है.....!!!
✍️त्रिलोक सिंह गिलाकोर
©trilok
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