जब हम गुजर रहे थे राह मोड़ कर
साथ तो थे पर जा रहे थे साथ छोड़ कर
अंधेरे से गली में रिश्तों को पीछे छोड़ कर
तूफान में कश्तियों का किनारों से मुंह मोड़ कर
तब वो भी थे वहां नज़ारा कश्ती का देखने
डूबते हुए जहाज के हारते जहाजी को देखने
आंख में आंसुं नहीं आया तो लगा मानो
वो भी आए हैं उनके मुताबिक ही बात रखने
©quotergii
Q