गिरा के दवात
उड़ेल के स्याही
कोरे कागज पे ।
करके आंखे बंद
मैंने ...
सिर्फ उंगली हीघुमाई थी ।
फिर पता नही कैसे
जमाने को उस कागज पे
तेरी तस्वीर नज़र आई थी।
बंद थी मेरी आँखें
लेकिन यादों पे तेरी परछाई थी
करके आंखे बंद कागज पे ..
जो उंगली घुमाई थी
सायद दिमाग में छपी तेरी तस्वीर
लेके सहारा स्याही का
कागज पे उत्तर आयी थी
©kumarrr
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