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"तसव्वुर-ए-इश्क़"

"तसव्वुर-ए-इश्क़"
तेरी उल्फत की ऐसी कशिश है मेरे दिल में,
कि हर लम्हा तेरा ही तसव्वुर रहता है।
ये हिज्र का दर्द भी अब अजीब सा सुकून देता है,
जैसे हर आह में तेरा ही नाम बसता है।
मेरे जज़्बात की अब कोई रफ़्तार नहीं रही,
सब तेरी इबादत में कहीं थम से गए हैं।
मैं तेरी मोहब्बत में कुछ यूँ फ़ना हो गया,
कि अब मेरा हर ख्वाब तुझसे शुरू होकर तुझ पर ही खत्म होता है… ❤️