T

तुम

रात का वक्त है,
मैं ख्यालों में जब्त हूं;
तन्हाई है,
मैं हूं,
तुम्हारी यादें हैं,
और गुनगुनाती हवाएं हैं;
सोच रही हूं...
काश, तुम भी होते;
तो शायद कहते कि
देखो, ये चाँद भी हमसे जलता है,
कोई तुम जैसा चाहता है,
शायद इसीलिए
अकेला रहता है;
मैं...
मुस्कुराती,
शर्माती,
और तुम्हारे बाँहों में
सिमट जाती;
पर जाने ये
कैसा वक्त है,
ना तुम हो,
ना तुम्हारी वो बातें हैं;
बस साथ जो रह गया है,
वो तुम्हारी
यादें हैं।।
©therupadey