K kamalsingh hi 23 जुलाई 2025 तुम और मेरी नींद कुछ गहरा रिश्ता है तुम्हारा और मेरी नींद का गुजरी शाम तुम तो रूठी हुई थी तुम्हारे साथ मेरी नींद भी रूठी हुई थी|©kamalsingh