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तुम, तुम हो या वो?

उनकी आँखों से दुनिया देखते हो!
तुम, तुम हो या वो?
क्या तुम स्वयं को जानते नहीं?
या फ़िर स्वयं को पहचानते नहीं ?
क्यूँ हक है दिया उन्हें,
की वो तुम्हें परिभाषित करे?
क्या तुम स्वयं को जानते नहीं?
या फ़िर स्वयं को पहचानते नहीं ?
उनकी आँखों से दुनिया देखते हो!
तुम, तुम हो या वो?
क्या तुम स्वयं को जानते नहीं?
या फ़िर स्वयं को पहचानते नहीं ?
तुम्हारी उलझने क्या उन्होंने सुलझाये?
या फिर तुम्हारे सवालों के जवाब दिलाये?
क्या तुम स्वयं को जानते नहीं?
या फ़िर स्वयं को पहचानते नहीं ?
उनकी आँखों से दुनिया देखते हो!
तुम, तुम हो या वो?
क्या तुम स्वयं को जानते नहीं?
या फ़िर स्वयं को पहचानते नहीं ?
क्या वो तब थे तुम्हारे साथ?
जब तिल तिल खुद से ही लड़ रहे थे?
या तब पास थे, जब हालातों से डर रहे थे?
क्या तुम स्वयं को जानते नहीं?
या फ़िर स्वयं को पहचानते नहीं ?
उनकी आँखों से दुनिया देखते हो!
तुम, तुम हो या वो?
क्या तुम स्वयं को जानते नहीं?
या फ़िर स्वयं को पहचानते नहीं ?
जब तुमने अपनी लडाई स्वयं लड़ी
जब स्वयं को स्वयं ही संभाला
तो क्या उनकी आँखे,
तुम्हें दुनिया दिखा पायेंगी?
क्या उनकी समझ तुम्हें समझ पायेगी?
क्या तुम स्वयं को जानते नहीं?
या फ़िर स्वयं को पहचानते नहीं ?
उनकी आँखों से दुनिया देखते हो!
तुम, तुम हो या वो?
©amour_anu