सर्द ये मौसम और हल्की बरसात।
चंदन और फूलों की खूशबू से भरी ये गलियां और
मध्यम सी आरती की आवाज...
शामों की हल्की सी रोशनी में दीपों से जगमगाता वो
गंगाघाट...
वो काशी की "ठंडाई" पीकर अब जलेबियां भी बेस्वाद और अब तो आम भी नीरस लगता है।
जब से आए हैं तुम्हारे शहर से....
अब हमें हर शहर बनारस लगता है ❤️
(साहिल)
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