दिल में फिर अरमान जग रहे हैं
आँखों में उनके सपने सजाए हैं
एक सुंदर सा आशियाना बनाए हैं
हसरत-ए-मुलाक़ात का शौक है बस
वरना ख्वाबो में तो उन्हें रोज आना है
किस्सा तो मशहूर है मेरे इश्क का
बस मेरे सनम ही अनजान बने फिरते हैं
मैं तो उनकी आरजू में यू भटकते फिर रही हूँ।
©miss-s
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