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तुम्हें याद हैं ना परिंदे का दर्द?

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तुम्हें याद हैं ना परिंदे का दर्द?
हर वित्ति से लड़कर देखो कैसे
ऊँचें आसमा में उड़ान भर रहे।
इस परिंदे की माँ को ज़रा महसूस करो,
बरसात के बावजूद देखो कैसे खाना इकट्ठा कर रही अपने बच्चे के लिए
और तुम घर होने सब कुछ होने के बावजूद,
घर से बाहर निकलना चाहते हो?
हाँ मैंने माना तुम्हें भी आज़ादी चाहिए ,
देश के लिए काम करना चाहते हो?
पंख फैलाकर उड़ान भरना चाहते हो?
अगर हाँ, तो मेरे दोस्त घर से बाहर मत निकलो कोरोना के वक्त।
पता हैं जैसे ही आज जब मैंने परिंदो को देखा
मैं दौड़ते हुए गई उनके लिए खाना लेने।
मैंने प्यार से उनके लिए खाना रखा और फिर
मैं और वो एकाएक एक दूसरे को देखते रहे।
मुझे लगा वो मुझसे डर गए हैं
मैं धीरे से चली गई वह से।
कुछ समय बाद मैं फिर से वह गई।
मैंने देखा कि वो खाना सामने रखे होने के बावजूद ख़ुले आसमान में भटक रहे ,
एक बात तो पक्की थी कि उन्हें भी हमारी तरह आज़ादी चाहिए।
चाहे भटके ऊँचे आसमा में या फिर किसी का शिकार ही क्यों ना बन जाएँ।
मैं करीब एक घंटे तक वही खड़ी अपना काम कर रही थी ,
जब भी वो खाना लेके आती
हर बार मैं अपना सर नीचे झुका कर जाने का रास्ता बनाती।
उस परिंदे को भी हर बार उसी रास्ते से जाना पसंद आता,
वो खाना रखकर कुछ समय मुझे देखती,
मानो वो मुझसे कुछ कह रही,
मैं जब उसकी आँखों में आँखे मिला देखती
तो वो ख़ुशी से अपना मधुर संगीत सुनाती
और अग़र मैं बिना देखे चुपचाप अपना काम करने लगाती
तो वो ज़ोर- ज़ोर से पंखो को
फड़फड़ाती।
जब मैं उसे देखती तो वो
अपनी अग़ली उड़ान भर वह से चली जाती।
Please Support our Government
Please Stay Home
BE BOLD
BE YOURSELF
BE SAFE FRIENDS❣
likes, & comment poetry gys...
next book comming soon...
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writer - ABHI
©abhi1998