K kamalsingh hi 23 जुलाई 2025 तुफान ए इश्क फसलों सी लहलहाती थी जिदंगी कभीपानी सा मदमस्त गुनगनाया करते थे परिंदो से चहका करते थे डाल डालवक्त की ऐसी हवा चली, इश्क सा तुफान आयाअसर ए तुफान इस कदर हुआ कि फसलों से उजड़ गये बंजर से विरान हो गये ©kamalsingh