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तू है न

तू मिला न सही,
तेरी आँखों की प्यास,
तो है न

दूर रह के भी, पास का एहसास
तो है न
दीदार न सही, तेरा ऐतबार
तो है न
कुछ नया न सही, पुरानी यादें
तो है न
मिल सके या ना ,
इक मुलाकात की आस,
तो है न
पुरी न सही, थोड़ी मगर जिक्र
तो है न
कुछ न सही, थोड़ी मगर
फिक्र तो है न

तु मिला न सही, तेरी ख्वाहिश
तो है न
तु ही तु बस, तू ही
तो है न
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