तवास्सुफ गैरों की वो करने लगे, कि वो घर अपना ही भूल गए।
कि अंचल में सितारे सीकर रखे थे हमने उनके, कि गिनना तो छोड़ो, वो तो हमसे बिना मिले ही चले गए।
चाय के शौकीन हम मुन्तजिर बैठे थे कि बुलाएंगे मेहबूब की चंद के साथ उम्रे बिता देंगे,लेकिन उनके तो सयोनी बदल गए।
तवास्सुफ गैरो की वो करने लगे ,कि घर अपनो का भूल गए।
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©rishab
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