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उम्मीद !!

उम्मीदों की कस्ती पर बैठकर सफर पे निकला था,
यार सुनामी बनकर आया, सारे सपना सफर में हीं छुटगया,
दुनिया इतनी मतलबी होता है यार!
विश्वासघात की सुनामी ने जब उम्मीदों की कस्ती को,
बीच भवर में लेजाकर डुबोया,तब मैं समझ पाया।
(राजीव टि न बनाया)
😡😡😡😡😡😡😡
©skmahto