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उम्मीद की राह

तेरी आजमाइश को हम नही समज पाये ए खुदा,
इस कदर कर दिया है हर आदमी को एक दुसरे से जुदा,
गर्दिश मे बेगर्द जमाने को लगती होगी,
पर अब इस धरती की फिजा को लगी है किसकी बददुआ,
मायूसीके बादलोंको हटाकर,
एक हौसले से हमने हमराही को कहा,
अपने-अपने घोसलोमे ही रहते है,
दुरियोका फासला रखकर, अपना आशियाँ फिर से सवारते है,
अपना अपना किरदार शिद्दत से निभाते है,
दुनिया को उम्मीद की राह दिखाते हुए,
करोना के जल्लाद को दुनिया से मिटाते है...
करोना के जल्लाद को दुनिया से मिटाते है. |
-- © संदीप राठोड, नाशिक, महाराष्ट्र, इंडिया.
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