उनमुक्त कर देना उसे
जिसके लिए तुम भार हो
जो खुश रहे ना साथ में
कैसा उसपर अधिकार…
उनमुक्त कर देना उसे जिसके लिए तुम भार हो जो खुश रहे ना साथ में कैसा उसपर अधिकार हो प्रेम से सींच कर ही आखिर संबंधों की फसल उगती यहां जिसको समझते हो प्रेम पाश हो ना हो व्योपार हो