( "पुत्र हो या पुत्री एक समान दृष्टि से देखने वाले पुरुष को "पिता''कहते है !)
(जहाँ पुत्र हो तो,कालांतर तक उसे पहचान देने वाले पुरुष को "पिता" कहते है!)
(पुत्री हो तो,अपना सर्वत्र न्योछावर कर देने वाले पुरुष को "पिता" कहते है !)
(माँ को सोलह श्रृंगार मे संवार कर रखने वाले पुरुष को "पिता "कहते है !)
(पूर्वजों द्वारा दिए गए संस्कार व संस्कृति को जन्म -जन्म तक संजोकर रखने वाले पुरुष को "पिता"कहते है !)
(भूमि की सतह को भव्य ईमारत मे बदलकर उसे "घर" का नाम देने वाले पुरुष को "पिता" कहते है !)
(पुत्र को'घर का चिराग'और पुत्री को'जिगर का टुकड़ा' कहते कहते न थकने वाले पुरुष को "पिता" कहते है !)
(न देख धूप न छाव न आंधी न तूफान चल आग के अंगार पर चलने वाले पुरुष को "पिता" कहते है !)
(पुत्र हो तो, अपनी हर शौक को मारकर पुत्र की जरूरतों को पूरा करने वाले पुरुष को "पिता "कहते है !)
( पुत्री हो तो, स्वयं के जीवन को 'चिंता की आग' पर तपाकर बेटी के दहेज़ का धन ताउम्र एकत्र पूरा करने वाले ऐसी महान आत्मा को ''पिता"कहते है !)🙏
can't say more... papa its enough for a daughter...
©priyagupta
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