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उत्तराखंड अभिनंदन

जय उत्तराखंड तेरा वंदन
नित नित तेरा ही अभिनंदन
ऊंचा भाल हिमालय उज्वल
बहता गंगा का निर्मल जल
ऊपर हिमनद की भीषण ठंड
नीचे बुग्यालों का विस्तृत खंड
पुलकित जिस पर पुष्पों के दल
सार मात्र से महका कंण कंण
गंगा यमुना जी के पावन तट
ऋषि मुनियों के अद्भुत मठ
आरोग्य योग की अविरल धारा
जन जन को जिसने है तारा
जय देव भूमि जय तपोभूमि हे
धर्म भूमि हे पुण्यभूमि हे
घने काननों से ढका तेरा तन
करता मन को हर्षित हर क्षण
Dheeraj gusain
©dheerajs