🎵देख! इस कंठ से निकली हुंकार हैं
🎵तड़ित , झंझावात , वारिश के साथ है
🎵आया तो है,
🎵पर वारिश के साथ
🎵सावन भी लाया है,
🎵अपने साथ
🎵फैलाओ अपने हाथों को
🎵उन वारिश के बूंदों तक
🎵दूर तलक चल,
🎵उन वारिशो के संग।
🎵अगर है तेरे अंदर,
🎵सुसज्जित चेतना
🎵तो सुन!
🎵मेरे वाणी को
🎵देख मेरे अंतर्मन को,
🎵और छू लें मेरे मन को
🎵मेरे पानी को,
🎵लें जा इसे अपने कंठ तक
🎵हो जा तृप्त जीवन भर,
🎵मगर!
🎵मत भूल उसे जो किया
🎵तृप्त उस क्षण तूझे।
"अमन कनौजिया"
©amanlxn
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