वास्तविकता को स्वीकार करो,
भले ही वह तुम्हें पसंद न हो –
विशेषकर तब जब वह तुम्हें
पसंद न हो,सामने की चीज़ों को
देखने के लिए निरंतर संघर्ष की
आवश्यकता होती हैसब कुछ
बिल्कुल वैसा ही है जैसा होना चाहिए
और वास्तव में इससे अलग हो ही नहीं सकता है।वास्तविकता को स्वीकार करो,
भले ही वह तुम्हें पसंद न हो –
विशेषकर तब जब वह तुम्हें
पसंद न हो,सामने की चीज़ों को
देखने के लिए निरंतर संघर्ष की
आवश्यकता होती हैसब कुछ
बिल्कुल वैसा ही है जैसा होना चाहिए
और वास्तव में इससे अलग हो ही नहीं सकता है।