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विदेश बना डाला,,,

सारी धरती मान चुकी थी ज्ञान का आधार हमें
सारी धरती मान चुकी थी वैभावता का द्वार हमें
सारी धरती मान चुकी थी वीरता की तलवार हमें
सारी धरती मान चुकी थी देवों का संसार हमें
हम संस्कृति की महिमा भूले
हम अपने देश की गरिमा भूले।
हमने अपनो को भुलाकर ये कैसा परिवेश बना डाला
हमने अपने, अपने देश को आज विदेश बना डाला
©keshavray