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विधार्थी का सफर

चलना सीखा हैं जिंदगी में पर
चल नहीं पाते हम|
बेज्जती का डर दिल में पाला हैं,
हटा नही पाते हम|
लोगो का तो काम ही हैं कहना पर
खुद को थाम नही पाते हम|
थमने की कोशिश करतेहै हम पर
लड़खड़ा जाते हम|
चलना सीखा हैं जिंदगी में पर
चल नहीं पाते हम|
सोचा कभी चल लेगे हम,
पर
सोचते ही रह गये हम|
लोग दुनिया में आगे बढ़ते गये
पर,
पीछे ही छूट गये हम|
फिर अचानक मन में आया,
क्यो पीछे हैं हम!
लोगो से नही खुद से ही बने हैं हम|
फिर कोशिश की
मगर वही हुआ
चलना सीखा हैं जिंदगी में पर
चल नहीं पाये हम|
कोशिश एक दिन रंग लाई'
आ गये कामयाबी पर हम|
लोगो ने मुझको अचंभित होकर देखा
पर
खिलखिला पड़े हम|
फिर क्या भूल पुरानी यादे आगे बढ़ चले हम
आगे बढ़ चले हम|
लेखक- राजीव झा
©yaari