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vidhi ka vidhan hai

ना ही मैं खुद मर सकता हु
ना ही किसी को मार सकता हु
मेरा खुद पर तो कोई जोर चलता नही
फिर किसी पर जोर कैसे चला सकता हु
यु तो मैने किसी से दगा किया नही कभी
फिर में अपने ही अस्तीत्व पर दाग केसे लगा सकता हु
जो भी पीछा छुड़ाना चाहते थे मुझसे
बस जाने दिया उन्हें
अब तो दूरियां मिलो की नही बल्कि
जन्म और जन्मांतर की है
जो जान थी कभी हमारी अब उसी से अंजान है
जाने किया था उस खुदा को मंजूर
लगता है जैसे यही विधि का विधान है
©deepakshar