काॅप उठा अकबर भी,
जब जयमल पत्ता की तलवार चली ।
भाग उठा गोरी भी,
जब चौहान की दहाड़ सुनी ।
हल्दीघाटी को लाल रंग दे दिया ,
बहलोल खा को घोड़े स्वत काट दिया ।
वह भारत की वीर था ,
जिसको देख ,
लोदी भी मैदान छोड़ भाग गया ।
अपने बेटे का बलिदान देकर ,
मेवाड़ नरेश को बचा लिया ।
शास्त्र संगीतकार था वह कुंभा,
जो हिंदू सूरज के कहलाया ।
जंगल में भटकने का रास्ता चुन,
मुगलों को खुब तड़पाया ।
नहीं मिला इंसाफ तक,
प्रताप की मृत्यु पर अकबर भी रोया ।
दुर्गा का अवतार लिए,
वो झांसी में आई थी ।
महादेव के नारे लगा कर,
खुन की नदियाँ बहाई थीं ।
~कवि रमेश बैनिवाल ~
©ramesh_29
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