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वियोग

वियोग
तुम तब भी थे संयोग की तरह
तुम अब भी हो वियोग की तरह
तुम मिलकर छूट गए
अब छुटकर जो मिले हो
जो विरह के रूप में मुझसे
अब तुम्हे पाकर इसे खोना नहीं है मुझे
तुम्हारा ना मिलना भी एक मिलना है
तुम्हारा ना होना भी एक होना है
जो कहीं रहा करता था
वो अब हर जगह रहता है
अदृश्य सा पर दृष्टिगत मुझको
अस्पृश्य सा संपूर्गत मुझको