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वो गई छोड़...

वो गई छोड़ के सोच अकेले मरेंगे हम,
     जीने के लिए उसके दिए सबक थे क्या कम।
     नहीं पहचानी अहमियत कोई बात नहीं,
     पढ़ कर जो फाड़ दे मैं उसके घर का अखबार नहीं।
©dilotak