R

वो जिसने मुझे पूरा कर दिया!!!

!अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकानाएं!
वो जिसने मुझे पूरा कर दिया,
वो जिसने मुझे पूरा कर दिया,
अधूरा सा हूं उन किरदारों के बिना जिनसे हो कर गुजरता हूं, कहूं क्या उनके बारे में, उनके लिए शायद शब्द उधार मांगने पड़ जाए, डूंडने पड़ जाए, शायद फिर भी कम पड़ जाए।
मां ने मेरी, छान कर पल्लू से मेरे जीवन के विष को अमृत कर दिया,
बांध कलाई पर राखी प्यारी मेरी बहन ने वीर सा वीरांग बना दिया।
मांग में लगा कर सिंदूर उसने मुझे अपना सब मुझे बना लिया।
कैसे पूरी करू मैं अपनी कहानी इनके बिना जिन्होंने ज़िदंगी भर जीना सीखा दिया।
चाहे दुख हो कितना भी हमेशा मुस्कुराना मैंने इसने सीखा है, तोड़ कर चाहते अपनी दूसरो को खुश करते देखा है।
हर वक़्त साथ अपनों का देना मैंने मेरी मां से सीखा है,हो मुसीबत कितनी भी बड़ी मैंने मां को हस्ते हुए उनसे जुजते देखा है।
तारीफ करूं मैं स्त्री की ऐसा मेरा लेख नहीं है, अनमोल शब्दों में उसका स्वर्ण लिखत अभिमान है।
माथे पर उसके मैंने शिकांज की रेखाओं को उभरते काले अंधेरों में देखा है, सुन कर बाते सारी समाज की फिर भी उभरते मैंने सिर्फ नारी को देखा है।
©rishab