जो धरती पर फैला दे जीवन
बूंदों में बसी इन्द्रधनुष की छाया
प्रकृति के हर रंग को अपने में समाया
वृक्षों की शाखों पर झूलती
कोमल हवा की धीमी सरगम
फूलों की महक लिए
भिनी भिनी खुशबू से लिपटा दिनकरम
नदी की धारा में छिपी कहानियाँ
पहाड़ों की चोटियों पे बिखरी चांदनी
प्रकृति एक कलाकार, बिन कहे, बिन जताए
सुंदरता की इस कृति में समाए
हर पल, हर दृश्य में बसी है एक कविता
प्रकृति ने जो सुन्दरता से सजाया
उसे निहार, मानव मन में उठता है विस्मय
कैसे यह सृष्टि, इतनी अद्भुत, इतनी माया!