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वर्षा

जब कभी भी बारिश होती,
बड़ा मजा आता हैं।
नन्ही-नन्ही बूंदों से,
तन मन भीग जाता हैं।
जब कभी भी बारिश होती,
बड़ा मजा आता हैं।
छिपे हुए जो मेंढक थे,
बाहर निकल वो आते हैं।
टर-टरकर गाना गाते,
और मग्न हो जाते हैं।
जब कभी भी बारिश होती,
बड़ा मजा आता हैं।
गंदे-संदे पेड़ पड़े थे,
वो भी तो धुल जाते हैं।
धूल मिट्टी जमी थी जिनपर,
वह स्वच्छ हो जाते हैं।
जब कभी भी बारिश होती,
बड़ा मजा आता हैं।
घुमड़-घुमड़ जब बदरा आते,
मयूर पंख फैलाता है।
यह मनोरम दृश्य देख,
मन बड़ा हर्षाता हैं।
जब कभी भी बारिश होती,
बड़ा मजा आता हैं।

Written by-
Dinesh Kumar
©dkpoet9