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याद 🥺

याद 🥺
कभी कभी अकेले हंसती हंसती रो देती हू मैं 🥺
फिर यादों को समेट के रख देती हू 🥺
जब वो दिन याद आते हैं तो भर आती है मेरी आंखें 🥺
कभी मैं रूठती तो तू था मनाता🥺
ओर कभी तू रूठता तो मैं भी तुझे मनाती 🥺
एक बात सच सच बताना क्या तुझे मेरी याद नही आती 🥺