अतीत की संकरी गलियों में भटकता हूँ,
हर याद में एक नई उम्मीद ढूँढता हूँ।
चेहरे धुंधले पर भावनाएँ जीवंत,
उन लम्हों में बसा हर दिन हर क्षण।
खुशियों के झरोखे, दुःख के संकेत,
साथ चले दोस्त, पीछे छूटे मीत।
वे पुराने पत्र, कुछ अधूरे गीत,
महसूस करता हूँ उनकी हर एक प्रीत।
मन का परिंदा, अतीत की ओर उड़ जाता है,
यादों के पंखों पर कहीं दूर तक जाता है।
पल वो 'कल' के, जो 'आज' में खो गए,
अतीत के जंगल में, खजाने जो सो गए।
हर याद में एक कहानी बसती है,
जीवन की इस किताब में सजीव रहती है।
अतीत से यादें, जैसे अमृत की बूँदें,
जीवन रूपी सागर में, स्नेह की सूक्तियाँ गूँदें।