धुंधले से चित्र, मुस्कुराते हुए
अतीत के पन्ने पलटती स्मृतियाँ
कभी हँसती, कभी रो देती
बीते हुए पल की कहानियाँ
साँझ की धूप में ढलती स्मृतियाँ
जैसे रेत में खोई हुई पगडंडियाँ
कभी करीब, कभी दूर
फिर भी मन में बसी हुई
धुंधले से चित्र, मुस्कुराते हुए
अतीत के पन्ने पलटती स्मृतियाँ
कभी हँसती, कभी रो देती
बीते हुए पल की कहानियाँ
साँझ की धूप में ढलती स्मृतियाँ
जैसे रेत में खोई हुई पगडंडियाँ
कभी करीब, कभी दूर
फिर भी मन में बसी हुई