यादों की गलियां

अतीत के पन्नों में छुपा,
कुछ मीठा, कुछ खट्टा सा लगता।
यादों की इस झील में डुबकी,
हर बार नया रंग बिखेरता।

बचपन की वो नादानियां,
दोस्तों के संग की गई शैतानियां।
खोई हुई वो गेंद, पीछे की वो दौड़,
हर बार दिल में जगाती है उमड़ प्यार।

कभी हँसी, कभी आँसू, कभी अनकही बातें,
अतीत के सफर में, यही साथ निभाते।
बीता हुआ कल जब भी दस्तक दे,
यादों की गली में, नए सपने सजाते।

कोने में पड़ी वो पुरानी तस्वीर,
समय की धूल चटकाती है अतीत की चीर।
पल में विस्मृत हो जातीं गमों की पीर,
जब अतीत का द्वार खोले, यादों की सरगम।