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ये है हिन्दुस्तानी सीना

समझाओ उन आतंकी अब्बा को,
जिन्दा दफन कर देंगे तेरे लल्ला को,
ये है हिन्दुस्तानी सीना,
जिसे डर नहीं तुझ जैसे नापाक औलादों से।
अरे! जिसे अपनी माँ की कोख की लाज नहीं,
वैसे कुत्ते अधर्मी आतंकी आँकाओं को कैसे छोड़ दूं,
ये है हिन्दुस्तानी सीना,
माँ कसम! तुझे जिनंदा जला दूंगा घूसकर तेरे घरों में।
आतंकी वह गीदर है,
जो आतंक फैलाने का गीदर भभकी देता है,
ये है हिन्दुस्तानी सीना,
जहाँ गीदर क्या टिक पाऐगा शेरों के आगे।
रोपोगे बबूल तो आम कहाँ से खाओगे,
जिहाद के नाम पे आतंक फैलाओगे
तो शांती कहाँ पाओगे, ये है हिन्दुस्तानी सीना,
जो तुझ नापाक को खुदा/धर्म के पाठ पढ़ाऐंगे।
-------- संदीप कुमार "संजन"
भगवानपुर,अररिया,बिहार
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