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ये लाश ज़िंदगी

जिंदगी लाश सी खूबरूसत है
हर कोई उन्हे प्यार से बुलाता है
मौत दर्द भरा हो भी तो
इस दर्द से आराम ही मिलता है
जीए कितने जज़्बात लेके
हर रोज इनसे लड़ते है
अपने ही हमे हंसाते और वही हमे रुलाते है
भूल भी जाए वो लम्हे दर्द के
वो हर बार उन्हे दोहराते है
जीना है अगर इस तरह जिंदगी
तो चलो लाश बन जाते है
कही अपने है कही हम खुद को पाते है
जरूरत पे हम और खुशियों में दूजे आते है
गम की क्या जरूरत जब आंसू वो दे जाते है
जिंदगी मर सी गई है चलो लाश बन जाते है।
©namrata05