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यह मस्तानों की दिल्ली है

इन मस्तानों के मस्ती में,
तेग गलियो की कुश्ती से,
हैरान है हर शागिर्द यहां का,
इसलिए वह यहां से निकल,
फतह कर लेना चाहता है एक नया जहां,
आम लोग यहां के सबसे निराले,
कहते फिरते हैं खुद को दिलवाले,
पर जिस दिन कोई नामर्द करता है
अपना मुंह काला
कहां छुपे बैठे रहते हैं ये सारे
सत्ता के गलियारे में हर पल
शोर है मचता
कभी मोदी तो कभी केजरी
सरकार के नाम पर हर कोई
एक लगने पर नए-नए आरोप मढ़ता,
शहर दिल्ली हैं इस गुलदस्ते का नाम,
और ये है दुनिया भर में अपनी
जहरीली हवा के लिए बदनाम
फिर भी इस लघु भारत को
मेरा शत-शत प्रणाम।
_अनुभव कुमार
©ranjna