जीवन के उद्देश्य हुई खुशफहमिया है,
हसीन कुछ यादो की अशर्फियां है,
प्रेम मे मचलती यह जवानियाँ है,
यह प्रेम ने ही तो हमे पूर्ण किया है।
हवाए चुम रही कुछ यूं कलाइयां है,
गर्मियों में जैसे लग रही सर्दियां है,
मानो हमे मिली जन्नत की वादियां है,
यह प्रेम ने ही तो हमे पूर्ण किया है।
आंखों ने आंखों से इशारा ये किया है,
आवाज प्रेम की हमारी कर्णप्रिया है,
कह रही पैरो की यह पायलिया है,
यह प्रेम ने ही तो हमे पूर्ण किया है।
कुछ कह रही हमे पतझड़ की पत्तियां है,
जवाब उन्हें दे रही हमारी चुडिया है,
इस प्रेम से ही तो मिली हमे शक्तियां है,
यह प्रेम ने ही तो हमे पूर्ण किया है।
सांसो में ही घुल रही बेचैनियां है,
अल्फाज़ो मे मिल रही ख़ामोशीया है,
यह सारी तो प्रेम की निशानियां है,
यह प्रेम ने ही तो हमे पूर्ण किया है।
मिलने से जिनके हम हुए सादिया है,
लिखी उनके लिए ही कुछ पंक्तिया है,
मिलने से जिनके हम हुए सादिया है,
यह प्रेम ने ही तो हमे पूर्ण किया है।
यह प्रेम ने ही तो हमे पूर्ण किया है।।
N.D. (Nisha Dasadiya)
©nishadkudi
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